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“बस्ती में सीलिंग का तमाशा: कागजों पर बंद, पर अमित हॉस्पिटल में खुलेआम ‘जिंदगी’ से खिलवाड़”

"धन्य है बस्ती का स्वास्थ्य विभाग! सील अस्पताल में भी धड़ल्ले से कट रहे पर्चे, साहब को खबर तक नहीं"

अजीत मिश्रा (खोजी)

सीलिंग के ‘जख्म’ पर भ्रष्टाचार का ‘मरहम’, बंद दरवाजों के पीछे से निकलकर खुलेआम जारी है मौत का खेल

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

  • “खाकी और खादी की नाक के नीचे ‘अवैध’ अस्पताल का खेल, सील दरवाजे के पीछे आखिर किसका संरक्षण?”
  • “सल्टौआ में स्वास्थ्य मानकों की उड़ी धज्जियां: अमित हॉस्पिटल ने सीलिंग को ठेंगा दिखाया, विभागीय चुप्पी पर उठे सवाल”
  • “सीलिंग सिर्फ दिखावा! बंद अस्पताल में मरीजों का मेला, भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी कार्यवाही”

सल्टौआ बस्ती ।। जनपद के स्वास्थ्य महकमे में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका जीवंत प्रमाण सल्टौआ क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। अनियमितताओं और मानकों की अनदेखी के कारण जिस ‘अमित हॉस्पिटल एंड अल्ट्रासाउंड सेंटर’ को विभाग ने बड़े तामझाम के साथ सील किया था, वहां आज कानून की नाक के नीचे न केवल इलाज हो रहा है, बल्कि विभाग की साख की धज्जियां भी उड़ाई जा रही हैं।

कागजों पर ‘ताला’, जमीन पर ‘हाशिए’ पर नियम

हैरानी की बात यह है कि जिस संस्थान को स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक रूप से बंद घोषित किया था, वहां की ‘सीलिंग’ महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है। शुरुआती दिनों में जो काम पिछले दरवाजे से चोरी-छिपे शुरू हुआ था, वह अब पूरी धड़ल्ले के साथ मुख्य द्वार से संचालित हो रहा है। मरीजों की आवाजाही और पर्चे कटने का सिलसिला बता रहा है कि संचालक को न तो कानून का खौफ है और न ही विभाग का।

खतरे में मरीजों की जान, जिम्मेदार मौन

बिना किसी मानक और सुरक्षा उपकरणों के संचालित हो रहे इस अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि:

  • यदि सीलिंग के बाद भी सेवाएं जारी हैं, तो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी टीमें कहाँ सो रही हैं?
  • क्या यह ‘खुला खेल’ विभागीय मिलीभगत के बिना संभव है?
  • अगर इस अवैध संचालन के दौरान कोई अनहोनी होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

“विभागीय कार्यवाही के बाद भी संस्थान का संचालन जारी रहना सीधे तौर पर प्रशासन को चुनौती है। यह महज एक अस्पताल नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर लगा एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है।”

उठते सवाल और गहरी होती आशंकाएं

स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों का मानना है कि निरीक्षण और कार्यवाही की यह पूरी प्रक्रिया महज ‘आईवॉश’ (आंखों में धूल झोंकना) थी। मानकों की धज्जियां उड़ाकर मरीजों की जान जोखिम में डालने वाला यह अस्पताल अब विभागीय लापरवाही का प्रतीक बन चुका है।

अब नज़रें कार्रवाई पर

अब देखना यह है कि जिले के आला अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर क्या संज्ञान लेते हैं। क्या अस्पताल के खिलाफ सख्त विधिक कार्यवाही की जाएगी या फिर भ्रष्टाचार के इस खेल में एक और फाइल दबकर रह जाएगी? इलाके की जनता अब ‘साहब’ के अगले कदम का इंतजार कर रही है।

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